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शपथ

सुश्री नमिता दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी निलेश के स्कूल में पृथ्वी दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही थी। उनके स्कूल में पिछले वर्ष एक नाटिका का मंचन हुआ था,जिसमें निलेश को वृक्ष बनाया गया था,किन्तु विकास के ठेकेदार लोभवश उस वृक्ष को बड़ी ही बेरहमी से काट देते हैं। वृक्ष(निलेश)बहुत दु:खी होता है। उस वृक्ष के काटने के बाद समाज के बुद्धिजीवी वर्ग जागते हैं,और एक संगोष्ठी करते हैं,जहाँ वृक्ष,नदी,तालाब,मिटटी,ऊर्जा संसाधन, पर्यावरण,और स्वच्छता पर बड़े-बड़े कसीदे पढ़े जाते हैं। नाटक के अंत में सभा के सभी सदस्य पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने की सामूहिक शपथ लेते हैं।

आज फिर कुछ इसी प्रकार के नाटक के मंचन की तैयारी चल रही थी,और नाटक के अंत में सभागार में उपस्थित सभी बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने की शपथ ली जा रही थी। निलेश का मासूम दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि,शपथ तो शपथ होती है,झूठी शपथ लेंगे तो जिसकी शपथ ले रहे हैं वह तो मर जाएगा। क्यों लोग शपथ लेने के बाद पुन: वृक्षों को काटते हैं ? नदियों को दूषित करते हैं ? क्यों प्रतिवर्ष इस धरा के अस्तित्व को बचाने के लिय शपथ की आवश्यकता होती है ? निलेश के असंख्य प्रश्न अब मुझे भी परेशान करने लगे थे।

परिचय : सुश्री नमिता दुबे का जन्म ग्वालियर में ९ जून १९६६ को हुआ। आप एम.फिल.(भूगोल) तथा बी.एड. करने के बाद १९९० से वर्तमान तक शिक्षण कार्य में संलग्न हैं। आपका सपना सिविल सेवा में जाना था,इसलिए बेमन से शिक्षक पद ग्रहण किया,किन्तु इस क्षेत्र में आने पर साधनहीन विद्यार्थियों को सही शिक्षा और उचित मार्गदर्शन देकर जो ख़ुशी तथा मानसिक संतुष्टि मिली,उसने जीवन के मायने ही बदल दिए। सुश्री दुबे का निवास इंदौर में केसरबाग मार्ग पर है। आप कई वर्ष से निशक्त और बालिका शिक्षा पर कार्य कर रही हैं। वर्तमान में भी आप बस्ती की गरीब महिलाओं को शिक्षित करने एवं स्वच्छ और ससम्मान जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। २०१६ में आपको ज्ञान प्रेम एजुकेशन एन्ड सोशल डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा `नई शिक्षा नीति-एक पहल-कुशल एवं कौशल भारत की ओर` विषय पर दिए गए श्रेष्ठ सुझावों हेतु मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और कौशल मंत्री दीपक जोशी द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा श्रेष्ठ शिक्षण हेतु रोटरी क्लब,नगर निगम एवं शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संगठन द्वारा भी पुरस्कृत किया गया है।  लेखन की बात की जाए तो शौकिया लेखन तो काफी समय से कर रही थीं,पर कुछ समय से अखबारों-पत्रिकाओं में भी लेख-कविताएं निरंतर प्रकाशित हो रही है। आपको सितम्बर २०१७ में श्रेष्ठ लेखन हेतु दैनिक अखबार द्वारा राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया है। आपकी नजर में लेखन का उदेश्य मन के भावों को सब तक पहुंचाकर सामाजिक चेतना लाना और हिंदी भाषा को फैलाना है।