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शब्द साधना व राष्ट्र चेतना का अनुपम संगम हुआ कल्पकथा काव्यगोष्ठी में

सोनीपत (हरियाणा)।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में २५३वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी साहित्यिक गरिमा एवं भावपूर्ण वातावरण में हुई। देशभर से जुड़े रचनाकारों की सहभागिता ने इसे विशेष रूप से सफल एवं स्मरणीय बनाया।
    संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह के अनुसार अध्यक्षता भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ ने की। मुख्य अतिथि का दायित्व मणिका वर्मा ने निभाया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात प्रेमलता कुमारी पुष्पेश, रमापति मौर्य, ज्योति प्यासी, अमित पण्डा, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, ‘प्रशांत’, नैन्सी श्रीवास्तव, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, शोभा प्रसाद, बिनोद कुमार पाण्डेय, राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने उत्कृष्ट काव्य रचनाओं की प्रस्तुति दी। रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक सरोकार, अध्यात्म तथा जीवन-मूल्यों की विविध भावधाराएँ प्रवाहित हुईं। इन सशक्त अभिव्यक्तियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
    कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के अंतर्गत सामूहिक राष्ट्रगीत गायन किया गया।
   कार्यक्रम का संचालन पवनेश मिश्र ने किया। समापन अवसर पर संस्थापक राधाश्री शर्मा ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।