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शिकार

गुलाबचंद एन.पटेल
गांधीनगर(गुजरात)
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जंगल में एक शिकारी,शिकार करने के लिए गया था। वो पूरे दिन जंगल में घूमा लेकिन उसे कुछ मिला नहीं,तो वो थक गया इसलिए एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठा। वो सोच रहा था कि काश कोई परी आ के हमें स्वर्ग में ले जाए,तो ये रोज-रोज की शिकार ढूंढने की मुसीबत टल जाए। थोड़ी देर बाद एक शेर अपने शिकार के लिए निकला था, उसने शिकारी को पेड़ के नीचे देखकर बहुत खुशी पाई। शिकारी की प्रार्थना सुनकर भगवान ने एक परी को भेजा गया था,वो उस शिकारी के पास आकाश में से आ रही थी। उसने देखा कि शिकारी पर शेर हमला करने की तैयारी कर रहा था। अब शेर जैसे ही हमला करने के लिए गया तो परी ने आवाज लगाई, शिकारी को कहा कि आप पर शेर हमला करने वाला है,इसलिए आप मेरे साथ स्वर्ग में चलो। तुम्हें भगवान ने बुलाया है,लेकिन शिकारी मानने के लिए तैयार नहीं था। शिकारी प्रभु स्मरण करते हुए सो गया,यह देखकर शेर ने शिकारी पर हमला किया तो परी शिकारी को बचाने के लिए उसे अपने साथ लेकर स्वर्ग में गई। शिकारी बच गया,तो वो आश्चर्य में पड़ गया,उसने भगवान को देखा तो बहुत ही खुश हो गया। अब परी के साथ मिलकर उसे रहना था,उसको अब जंगल में शिकार के लिए जाना नहीं होगा। वो स्वर्ग में थोड़े दिन खुशी से रहा लेकिन उसे यहा कुछ भी नहीं करना था। खाना पीना और आराम से रहने का,लेकिन वो थोड़े ही दिनों में ऊब आ गया। उसने एक दिन जमीन पर आने के लिए इच्छा जताई तो परी ने कहा कि तुम अब वहां सलामत नहीं हॊ,शेर आपकी तलाश कर रहा है,इसलिए आपका यहाँ रहना उचित है। शिकारी ने मन बना लिया और प्रभु भक्ति में लीन होकर परी के साथ सुख-चैन से रहने लगा।