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शेरसिंह राणा की शौर्य गाथा

मंगल प्रताप चौहान
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)

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क्षत्रियों पर संकट जब आन पड़ा,
तब हिन्द ने रुड़की में ऐसा शेर जना।
तिहाड़ भी जिसको रोक न सका,
अफगानिस्तान भी न कर सका मनाll

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों को भी जिसने,
मुल्लों के मुल्क से डटकर छीन लिया।
चार बांस चौबीस गज से भी बड़े जिगरे वाला,
माँ भवानी के पुत्र राणा ने पूरा प्रण कियाll

संघर्ष और वीरता के प्रतीक,
शेर-ए-हिंद को जानता पूरा जहान है।
बहमई कांड का बदला लेने वाला,
हिंदुआ गौरव,शेरसिंह राणा महान हैll

आज हिन्द की मिट्टी भी यही बात दोहराती है,
जब-जब राजपूती सम्मान की रक्षा आन पड़े।
तब-तब इतिहास के स्वर्ण अक्षर भी,
शेरसिंह राणा के शौर्य से लिखे जाते हैंll

हे राजपूत क्षत्रिय! हे वीर शिरोमणि!,
तुम सब भी शौर्य गाथाओं को गढ़ लेना।
जब भी हिंदुत्व रक्षा की बात उठे,
तब एक बार शेरसिंह राणा को पढ़ लेनाll

परिचय-मंगल प्रताप चौहान की जन्मतिथि २० मार्च १९९८ और जन्म स्थान-ग्राम अकछोर राबर्ट्सगंज, जिला सोनभद्र(उत्तर प्रदेश) है। यहीं आपका निवास है। वाणिज्य से स्नातक श्री चौहान ने यू.जी.डी.सी.ए., डी.एल.एड.,एन.एस.एस. और एन.सी.सी. की शिक्षा भी ली है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षा,साहित्य एवं समाजसेवा है। सामाजिक गतिविधि के तहत आप समाज में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को अपनी कलम की लेखनी से उखाड़ फेंकने की क्षमता के साथ सक्रिय हैं। इनकी लेखन विधा-कविता एवं लेख है। दिल्ली स्थित प्रकाशन से आपकी रचना का प्रकाशन हुआ है। ऐसे ही हरियाणा तथा अन्य के समाचार पत्रों में भी आपकी मुख्य रचनाएं छपी हैं। मंगल प्रताप चौहान की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और अपनी लेखनी से सकारात्मक परिवर्तन लाना है।