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सनातन संस्कृति का नव वर्ष

तृप्ति तोमर `तृष्णा`
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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गुड़ी पड़वा विशेष….

है आज इतना पावन औऱ खुशी का अवसर,
नए साल में होता नए कार्य का प्रचार-संचार।

सनातन धर्म,संस्कृति के साल का आरंभ,
गुड़ी पड़वा,चैत्र नवरात्र का होता शुभारंभ।

माँ के नौ अलग-अलग रूपों का होता स्थापन,
जिससे मन में भक्ति,श्रद्धा-शक्ति का होता आगमन।

अनेक त्योहार,रीति,परंपरा से सज़ा हो ये हमारा नववर्ष,
सभी के जीवन में लेकर आए हँसी,खुशी औऱ हर्ष।

जहाँ है तापमान बढ़ने से तपिश,तो है बारिश का भी इंतजार,
फसल के कटने से लेकर पुनः बोवनी का तय हो जाता सफ़र।

बीते साल के साथ शिक्षा सत्र,सरकारी दफ्तरों का कार्य पूर्ण होना,
वहीं गुड़ी पड़वा के उत्साह के साथ आगामी वर्ष के लिए तैयार होना।

परिचय-तृप्ति तोमर पेशेवर लेखिका नहीं है,पर प्रतियोगी छात्रा के रुप में जीवन के रिश्तों कॊ अच्छा समझती हैं।यही भावना इनकी रचनाओं में समझी जा सकती है। आपका  साहित्यिक उपनाम-तृष्णा है। जन्मतिथि २० जून १९८६ एवं जन्म स्थान-विदिशा(म.प्र.) है। वर्तमान में भोपाल के जनता नगर-करोंद में निवास है। प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाली तृप्ति की लेखन उम्र तो छोटी ही है,पर लिखने के शौक ने बस इन्हें जमा दिया है। एम.ए. और  पीजीडीसीए शिक्षित होकर फिलहाल डी.एलएड. जारी है। आप अधिकतर गीत लिखती हैं। एक साझा काव्य संग्रह में रचना प्रकाशन और सम्मान हुआ है।

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