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सभी की प्यारी हिंदी

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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हिंदी और हमारी जिंदगी…

क्लिष्ट संस्कृत कालांतर में,
बन बंगाली कन्नड़ उड़िया
पंजाबी सिंधी गुजराती,
मलयालम तेलगु असमिया।

राजस्थान, मराठी, नेपाली,
अवधि, ब्रज, गोंडी, भोजपुरी
हरियाणा कश्मीरी कुमांयू,
बनारसी गोंडी छत्तीसगढ़ी।

संस्कृत से ही भाषा उपजी,
भाषा से उत्पन्न हो बोली
बोली का ध्वंश रूप बानी,
बानी सबसे छोटी भोली।

लोक कहावत है इक वैसे,
‘कोस-कोस में बदले पानी’
कितने ठीक कहा करते हैं,
‘दस कोसन में बदले बानी।’

संस्कृत की सब उद्भिज भाषा,
ले कुछ शब्द लगाई बिंदी
तब सुंदर इक भाषा निकली,
खुश हो नाम रखे सब हिंदी।

कालांतर मुगल आए भारत,
भाषा देश संस्कृति अनजानी
हिंदी में संस्कृत कठिन शब्द,
बोल न पाए थी परेशानी।

हिंदी मिला अरबी-फारसी,
उर्दू बन नई भाषा
फिरंगी कॉकटेल बना फिर,
हिंदी बनी हिंग्लिश तमाशा।

हिंदी का दिल बहुत बड़ा है,
आत्मसात सब ही भाषा की।
यह सहज-सरल सरस सलिल-सी,
बहती बनी राजभाषा भी॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।