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सुकून

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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“अमन…. मैं ऑफिस जा रही हूँ,” राधिका अपने पर्स को उठाते हुए बोली। “ओके बाय टेक केयर…..।”
राधिका ने अपनी पुरानी स्कूटी स्टार्ट की और निकलने को तैयार हुई, तभी पड़ोसन ने बोला-“भाभी आपकी स्कूटी पुरानी हो गई है, कार लेलो। आपकी पर्सनाल्टी पर अब यह फबती नहीं है।” राधिका बिना कुछ बोले गाड़ी की चाबी लेकर स्कूटी स्टार्ट करते हुए मुस्कुराते हुए बाहर निकल गई। तभी उसने देखा सड़क पर झाड़ू निकाल रही भाभी मुस्कुराते हुए भजन गाते हुए झाड़ू निकाल रही थी। वहीं सामने पन्नी बीनने वाली महिला आज अधिक खुश दिख रही थी, शायद उसे आज रोज से ज्यादा पन्नी मिली थी।
उसे देखकर लगा, जैसे-उसे भी अपने जीवन से कोई शिकायत नहीं है। तभी एक चमचमाती कार पीछे से गुजरी, जिसमें पीछे रहने वाली मिसेज सोलंकी बैठी हुई थी… वह जोर-जोर से फोन पर चिल्ला-चिल्ला कर बातें कर रही थी, चेहरा तमतमा रहा था। बहुत गुस्से में दिख रही थी, पता नहीं किससे चिल्ला कर बोली,-“मेरे जीवन में तो बिल्कुल सुख नहीं, दुखी हो गई हूँ मैं जिंदगी से…।”

तीनों महिलाएं ने बड़े ध्यान से उसकी जाती हुई बड़ी-सी कार को देखा…। उनके चेहरे पर सुकून झलक गया ओर वह अपने-अपने काम में लग गई।

परिचय-डॉ. वंदना मिश्र का वर्तमान और स्थाई निवास मध्यप्रदेश के साहित्यिक जिले इन्दौर में है। उपनाम ‘मोहिनी’ से लेखन में सक्रिय डॉ. मिश्र की जन्म तारीख ४ अक्टूबर १९७२ और जन्म स्थान-भोपाल है। हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाली डॉ. मिश्र ने एम.ए. (हिन्दी),एम.फिल.(हिन्दी)व एम.एड.सहित पी-एच.डी. की शिक्षा ली है। आपका कार्य क्षेत्र-शिक्षण(नौकरी)है। लेखन विधा-कविता, लघुकथा और लेख है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन कुछ पत्रिकाओं ओर समाचार पत्र में हुआ है। इनको ‘श्रेष्ठ शिक्षक’ सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। लेखनी का उद्देश्य-समाज की वर्तमान पृष्ठभूमि पर लिखना और समझना है। अम्रता प्रीतम को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाली ‘मोहिनी’ के प्रेरणापुंज-कृष्ण हैं। आपकी विशेषज्ञता-दूसरों को मदद करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिन्दी की पताका पूरे विश्व में लहराए।” डॉ. मिश्र का जीवन लक्ष्य-अच्छी पुस्तकें लिखना है।

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