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सुकून

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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लंबे अरसे के बाद आज की रात हम सुकून से सोए हैं,
भूलकर सारी दुनिया को फिर से हम खुद में खोए हैं।

चैन भी नहीं मिला नींद भी मुक्कमल नहीं थी..,
बीत जाती जो घड़ी लगा कि बस वही सही थी..।
कुछ बातें थी अनकही कुछ पर तो मैंने कही थी..,
बदल गए थे वो सब अफसाने पर मैं तो वही थी..।

नजर ना लगा देना यारों ख्वाबों को खुद में पिरोए हैं,
लंबे अरसे के बाद आज की रात हम सुकून से सोए हैं।

अनजान शख्स के लिए खुद को हमने खोया था..,
अपनी ही राहों में खुद काँटा ‘मलिक’ बोया था..।
‘सुषमा’ का दिल फिर हर पल जार-जार रोया था..,
देकर दर्द वो सुकून से हर पल पनाहों में सोया था..।

हमें ना जगाना यारों हम नींद में खुद को डुबोए हैं,
लंबे अरसे के बाद आज रात हम सुकून से सोए हैं॥

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।