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स्नेह-सुधा बरसाती राखी

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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श्रावण की पूर्णिमा, पावन प्रभात है,
स्नेह-सुधा बरसाती, राखी की बात है
रोली-अक्षत सजे, दीपों की पाँत है,
भाई की कलाई पर, बहना का हाथ है।

रेशम की डोरी में, नेह का निधान है,
बचपन की स्मृतियों का, मंगल-गान है
बहना के ओठों पर, नित मंगल-गान है,
भैया के सुख हेतु, मन में अरमान है।

न धन की अभिलाषा, न जग का मान है,
भाई सुखी रहे बस, इतना ही ध्यान है
दूरी भले बढ़े पर, अटूट पहचान है,
राखी का यह बंधन, जीवन की शान है।

हर जन्म साथ रहे, प्रेम का प्रकाश हो,
सुख-दुःख में एक दूजे, हृदय के पास हो।
भाई-बहन के रिश्ते में, स्नेह का विकास हो,
रक्षाबंधन सदा ही, मंगलमय उल्लास हो॥