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स्पर्धा में प्रो. लक्ष्मी यादव व श्रीमती राधा गोयल प्रथम विजेता

उमेशचंद यादव और डॉ. अरविन्द जैन को मिला द्वितीय स्थान…

इंदौर (मप्र)।

हिंदीभाषा डॉट कॉम परिवार द्वारा निरन्तर स्पर्धा कराना जारी है। इसी क्रम में ६३ वीं स्पर्धा ‘प्रकृति और खिलवाड़’ विषय पर कराई गई। इसमें पद्य वर्ग में श्रीमती राधा गोयल एवं गद्य वर्ग में प्रो. लक्ष्मी यादव ने प्रथम स्थान की जीत प्राप्त की है। मंच-परिवार की सह-सम्पादक श्रीमती अर्चना जैन और संस्थापक-सम्पादक अजय जैन ‘विकल्प’ ने बताया कि हिंदी साहित्य अकादमी (मप्र) से अभा पुरस्कृत एवं १ राष्ट्रीय कीर्तिमान-७ सम्मान प्राप्त १.५१ करोड़ दर्शकों-पाठकों का अपार स्नेह पाने वाले इस मंच द्वारा कराई गई उक्त स्पर्धा में विद्वान निर्णायक मंडल ने पद्य वर्ग में प्रथम स्थान पर ‘जीवन अब बिखरा-बिखरा’ रचना के लिए दिल्ली वासी श्रीमती गोयल को विजेता माना है। ऐसे ही दूसरे क्रम पर ‘कुदरत से ना खेल’ के लिए उमेश चंद यादव (उप्र) तथा ‘धरती माँ की बढ़ती पीड़ा’ हेतु तीसरा स्थान एच.एस. चाहिल (छग) को दिया गया है।
आपने बताया कि, संयोजक डॉ. सोनाली सिंह, परामर्शदाता डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी (मप्र), मार्गदर्शक डॉ.एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’, सरंक्षक डॉ. अशोक जी (बिहार), विशिष्ट सहयोगी एच.एस. चाहिल (छग) एवं प्रचार प्रमुख श्रीमती ममता तिवारी ‘ममता’ (छग) ने सभी विजेताओं व सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है।

श्रीमती जैन ने बताया कि, गद्य वर्ग में प्रथम स्थान ‘प्रकृति माँ को बचाओ’ पर प्रो. लक्ष्मी यादव (महाराष्ट्र) को दिया गया है। इसी तरह द्वितीय विजेता ‘मानसिक प्रदूषण दूर करना और सीमित होना होगा’ के लिए डॉ. अरविन्द जैन (मप्र) एवं ‘कौन है दोषी ?’ रचना की उत्कृष्टता पर शशि दीपक कपूर (महाराष्ट्र) को तृतीय विजेता चुना गया है।

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