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स्वार्थियों से जंग कब तक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’
ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर)

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मेरी डायरी से……भाग-१

मेरा जीवन शीशे की भांति साफ है। बचपन से ही जो मन में होता है,वही बाहर होता है। मैं दोगलापन न करता हूँ और न ही सहन करता हूँ। इसलिए दूसरों से बिल्कुल भिन्न हूँ। समाज में फैली कुरीतियों से अत्यंत दुखी हूँ। समाजसेवा,ईमानदारी व देशभक्ति मेरी कमजोरी है। यही कमजोरियां मेरी पीड़ाओं व प्रताड़नाओं का कारण भी हैं,जो अत्यन्त दुखद हैं।
इसलिए जब-जब मुझ पर अत्याचार हुए,मैंने विरोध किया और असफलता के तनाव से बेसुध हुआ। जिसे हरामी,भ्रष्ट,झूठे,बेईमान एवं स्वार्थी लोग दशकों से ‘पागलपन व नाटक’ की संज्ञा देकर मेरे ऊपर हुए ‘क्रूरत से क्रूरतम’ अत्याचारों को एवं उनसे उत्पन्न समस्याओं को दबाते आ रहे हैं,जिसके कारण मुझे विचित्र असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ता है और उसी पीड़ा के दबाव से मैं वर्षों से बेसुध होता आ रहा हूँ। इसी बेसुधी के आधार पर अपराधी एक तरफ मेरा शोषण करते हैं,दूसरी तरफ मेरी छवि को खराब करते हैं। यही कारण है कि मैंने राष्ट्रपति से ‘सम्पूर्ण न्याय या इच्छा-मृत्यु’ मांगी हुई है।
सत्य यही भी है कि,विशेष प्रकार का असहनीय भयंकर पीड़ादायक सभ्य समाज मुझे कतई अच्छा नहीं लगता,क्योंकि उक्त तथाकथित सभ्य समाज इतना असभ्य है कि इसे परिभाषित करना कठिन ही नहीं,बल्कि असम्भव है। इस पर उक्त कहावत ‘सौ में से निन्यानवे बेईमान,फिर भी मेरा भारत महान’ चरितार्थ होती है।
इस भयंकर पीड़ा से बचने के लिए मैं अधिकांश समय ईमानदारी,अच्छे काम व देशप्रेम में व्यस्त रहता हूँ,जिसके कारण भ्रष्ट व स्वार्थियों को मैं अच्छा नहीं लगता। इसके आधार पर वह मुझे ‘पागल व नाटकबाज’ की संज्ञा देकर प्रताड़ित करते हैं।
इसी प्रताड़ना को ‘पागल’ सिद्ध करने हेतु मेरे विभागीय भ्रष्ट व क्रूर अधिकारियों ने मुझे मनो चिकित्सालय में भर्ती कराया था,जहां पांच मनोविशेषज्ञों के बोर्ड ने गहन जांच के बाद जारी किए प्रमाण-पत्र में मेरी इस पीड़ा को ‘मलएडजस्टमेंट’ अर्थात ‘बुरा प्रबंध’ व ‘सिचुएशनल रिएक्शन’ का नाम दिया था। यह भी लिखा कि उक्त पीड़ा मानसिक रोग में नहीं आती,इसलिए उन्होंने लिखित सलाह दी हुई है कि रोगी को उपचार के लिए दवाईयां न दी जाएं।
विडम्बना यह भी है कि उक्त प्रमाण-पत्र के बावजूद मेरे विभाग एसएसबी ने उच्च न्यायालय में भी मुझे ‘पागल’ सिद्ध कर दिया और ‘पागल की पेंशन’ भी दे दी,जिसे मैंने दिव्यांगजन न्यायालय में चुनौती दी। इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दिव्यांगजन न्यायालय के आदेश पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (दिल्ली) के पांच मनोविशेषज्ञों ने २०१७ में गहन जांच कर मुझे स्वस्थ घोषित कर दिया। इसके आधार पर दिव्यांगजन न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा कि उक्त प्रार्थी न तो मानसिक रोगी है,न ही दिव्यांग है। उसके बावजूद भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीनस्थ एसएसबी विभाग आज भी मुझे ‘पागल’ की ही पेंशन दे रहा है,जो संविधानिक अपमान है।
इसकी शिकायत मैं प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भी कर चुका हूँ,मगर समस्या का समाधान कुछ भी नहीं हुआ।
कटु सत्य यह है कि मेरी समस्याओं को मेरे घर-परिवार,बिरादरी,तथाकथित सभ्य समाज और सरकार ने भी कभी गंभीरता से नहीं लिया है। यदि विवश हो कर कभी संज्ञान लिया भी है तो उसका मात्र निपटारा किया है। स्पष्ट शब्दों में कहूँ तो ‘सम्पूर्ण समाधान एवं न्याय’ कभी भी नहीं किया।
यही मेरा दुर्भाग्य भी है कि सभ्य समाज के बुध्दिजीवी अपनी गुप्त पीड़ाओं व सीमित सीमाओं के कारण चुप्पी साध लेते हैं और बेईमान एवं स्वार्थी मुझे ‘पागल व नाटकबाज’ कहकर मेरी पीड़ाओं को तमाशा बना देते हैं,जिससे अपराधी अपना अपराध छुपाने में कामयाब हो जाते हैं।
अब गंभीर एवं संवेदनशील प्रश्न यह है कि,उक्त भ्रष्टाचारी,बेईमान,झूठे,क्रूर लोग मुझे ‘पागल व नाटकबाज’ कहकर कब तक सताते व जलाते रहेंगे ? क्यों मुझे मंदिर के घंटे की भांति बजाते रहेंगे ? आखिर क्यों और कब तक मेरे स्पष्ट संवैधानिक प्रश्नों को असंवैधानिक तरीके से दबाकर मेरी असहनीय पीड़ा को ‘पागल व नाटक’ कहा जाएगा ?

परिचय-इंदु भूषण बाली का साहित्यिक उपनाम `परवाज़ मनावरी`हैl इनकी जन्म तारीख २० सितम्बर १९६२ एवं जन्म स्थान-मनावर(वर्तमान पाकिस्तान में)हैl वर्तमान और स्थाई निवास तहसील ज्यौड़ियां,जिला-जम्मू(जम्मू कश्मीर)हैl राज्य जम्मू-कश्मीर के श्री बाली की शिक्षा-पी.यू.सी. और शिरोमणि हैl कार्यक्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों से लड़ना व आलोचना है,हालाँकि एसएसबी विभाग से सेवानिवृत्त हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पत्रकार,समाजसेवक, लेखक एवं भारत के राष्ट्रपति पद के पूर्व प्रत्याशी रहे हैंl आपकी लेखन विधा-लघुकथा,ग़ज़ल,लेख,व्यंग्य और आलोचना इत्यादि हैl प्रकाशन में आपके खाते में ७ पुस्तकें(व्हेयर इज कांस्टिट्यूशन ? लॉ एन्ड जस्टिस ?(अंग्रेजी),कड़वे सच,मुझे न्याय दो(हिंदी) तथा डोगरी में फिट्’टे मुँह तुंदा आदि)हैंl कई अख़बारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl लेखन के लिए कुछ सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैंl अपने जीवन में विशेष उपलब्धि-अनंत मानने वाले परवाज़ मनावरी की लेखनी का उद्देश्य-भ्रष्टाचार से मुक्ति हैl प्रेरणा पुंज-राष्ट्रभक्ति है तो विशेषज्ञता-संविधानिक संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम में जीवन समर्पित है।