सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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जन-मन का भाव हिंदी (हिंदी दिवस विशेष)…
हिंदी सभ्य संस्कार जगाती,
गुनगुनाऊं जब, झूमे हिंदीं
मन के छंद बुनती हिंदी,
सुन्दर मधुर तान हिंदी।
हिंदी मेरी धवल शान है,
हिंदी मेरी स्वाभिमान है
हिंदी मेरी मातृ पहचान है,
हिंदी मेरी राष्ट्र पहचान है।
हिंदी साहित्य रस उड़ेल,
गद्य पद्य मनोहर रसाल
हिंदी कविता मन डोल,
हिंदी जग में रस है घोल।
हिंदी से हिन्दुस्तान जान,
हिंदी में संस्कृत है जान
हिंदी ज्ञान,अथाह पहचान,
हे जन! क्यों अनजान।
हिंदी;हिंदी जन निरानंद,
पढ़ते-सुनते जन निरानंद
इंग्लिश में रस दंभ आनंद,
हिंदी क्यों कमतर, निरानंद।
हिंदी गरिमा कहीं न पाए,
स्थान तके दिशाकाश है
सब मिलकर प्रयत्नशील हैं,
हिंदी अपना स्थान;मान पाए।
हिंदी गिरधर की मीरा,
हिंदी सुधा सम बहत समीरा
हिंदी प्रेमचंद,संत तुलसी कबीरा,
हिंदी जन-जन मन हिय हिलोरा।
हिंदी की महत्ता कितनी गाते,
हिंदी:राष्ट्र से अनजान पाते।
इंग्लिश-विंग्लिश शान सजाते,
साक्षरता;इंग्लिश पहचान पाते॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।