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हुस्न की फिजा

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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हुस्न की फिजा ज़रा,
नीची रखिए
आजकल दरख्तों के साए में,
जुगनू बसते हैं।

जहां दिखाई दे रही हैं,
मखमली चादर
दरअसल उस जगह पर
काँटे बिछते हैं।

छिपा है दिल में कोई राज,
ये कोई नहीं जानता
महफ़िल में अजनबी भी,
बेवजह गरजते हैं।

भरोसा उठ गया है,
लोगों की खुद्दारी पर से
दिल में छिपे अरमान,
धूं-धूं जलते हैं।

वफ़ा के बदले वफ़ा मिले,
ये जरूरी तो नहीं।
महफ़िल में लोगों के बीच,
अपने ही लरजते हैं॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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