कुल पृष्ठ दर्शन : 325

You are currently viewing हे कृष्ण पुनः अवतार धरो

हे कृष्ण पुनः अवतार धरो

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

*************************************************************************

कृष्ण जन्माष्टमी स्पर्धा विशेष……….

जग से अधर्म मिटाने को,
दुनिया को धर्म सिखाने को
अज्ञान का तम हरने को,
ज्ञान प्रसारण करने को
अब पाञ्चजन्य उदघोष करो,
हे कृष्ण पुनःअवतार धरो।

शासक को नृप नीति सिखाने,
अबला नारी की लाज बचाने
शांति और सदभाव बढ़ाने,
मानवता का पाठ पढ़ाने
फिर से गीता पाठ करो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

सृष्टि विनाश का पुरश्चरण,
दुःशासन करते चीर हरण
द्रोपदी करती करुण पुकार,
मच रहा सृष्टि में हाहाकार
अब दुष्टों का संहार करो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

जनता है शोषित और वंचित,
नेता करते अभिनय मंचित
मानव मानव में द्वेष भाव,
शकुनि लगवाते गलत दाव
अब प्रेमभाव संचार करो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

है युद्ध धर्म और अधर्म बीच,
सब एक दूजे को रहे खींच
अर्जुन हो रहा कर्त्तव्यविमुख,
है खड़ा हुआ वो समर सम्मुख
उसको अब सन्मार्ग करो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

गांगेय देवव्रत हो रहे विवश,
है पाप देखकर भी खामोश
धृतराष्ट्र पुत्रमोह में फँसे हुए,
कौरव दुराचार में लगे हुए
अब पाप-अनीति ख़त्म करो,
है कृष्ण पुनः अवतार धरो।

नर भोग विलास में डूब रहा,
कुदरत से वह खेल रहा
निर्बल पर होते अत्याचार,
अबला की इज्जत तार तार
अब शारंग चाप संधान करो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

दुनिया भ्रष्टाचार की मंडी है,
यहाँ पूरा साम्राज्य शिखंडी है
हर कोई है बेबस लाचार
बढ़ रहे जुल्म और अत्याचार
अब चक्र सुदर्शन हाथ धरो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

भाई-भाई में है शत्रु भाव,
रिश्तों के हो रहे मोल भाव
नर अहंकार से भरा हुआ,
दुनिया को छोटा समझ रहा
अब फिर से एक हुंकार भरो,
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो।

बढ़ रहा सभी में द्वेष भाव,
मिट गया प्रेम और सदभाव
वशीभूत हैं सभी स्वार्थ के,
काम न करता है परमार्थ के
होंठों पे मुरली आविष्ट करो।
हे कृष्ण पुनः अवतार धरो॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

Leave a Reply