हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)…
दुनिया में यह रिश्ता,
बहुत ‘पवित्र’ व अमर है
स्नेह का यह ‘कच्चा’ धागा,
भाई के हाथों में ‘रक्षा’ कवच होता है।
ये धागों का ‘बंधन’ है भाई,
जहां रिश्तों की ‘डोर’ मजबूत होती है
राखी का पर्व भाई-बहन के लिए एहसास है,
भाई के हाथों में वह ‘रक्षा’ कवच होता है।
बहन की रक्षा करना, हर भाई का फर्ज होता है,
सुख हो दुःख हमेशा ‘साथ’ निभाना होता है।
रक्षा बंधन का यह पर्व ‘रिश्तों’ की मज़बूत डोर है,
भाई के हाथों में ‘बहन’ का रक्षा कवच होता है॥