नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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नींद एक है अमीर और गरीब की,
प्यास एक है अमीर और गरीब की।
माँ एक है अमीर और गरीब की,
छाया एक है अमीर और गरीब की।
काया एक है अमीर और गरीब की,
पीड़ा एक है अमीर और गरीब की।
खून एक है अमीर और गरीब का,
रिश्ता एक है अमीर और गरीब का।
पानी एक है अमीर और गरीब का,
हवा एक है अमीर और गरीब की।
दूध एक है अमीर और गरीब का,
आँसू एक है अमीर और गरीब का।
बीमारी एक है अमीर और गरीब की,
मौत एक है अमीर और गरीब की।
फिर क्यों इतना अन्तर अमीर-गरीब का,
यह कैसी विवशता, यह कैसी असमानता ?
ओ देश के प्रहरियों!
कैसे होगी दूर ये असमानता ?
भारत कब एक कहलाएगा, कब रंग लाएगा,
भारत में कब समानता का रंग आएगा ???