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अम्बे, तेरी जय

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…

नील वितान-पटल तले माँ,
किसने रक्तिम रेखा खींची ?
किसकी दिव्य दृष्टि से जागी,
निद्रित सृष्टि, दिशाएँ सींचीं ?

किसके नूपुर के स्वर से माँ,
कालचक्र गतिमान हुआ ?
किसके संकल्पों की अग्नि से,
जड़ जग चेतनवान हुआ ?

शुम्भ-निशुम्भ-दर्प हरने को,
किसने था अद्भुत रूप धरा ?
चण्ड-मुण्ड-मर्दन करने को,
किसने था हुंकार भरा ?

रक्तबीज के उन्मत्त रुधिर को,
किसने था खप्पर में लिया ?
महिषासुर के दुर्दम दर्प का,
किसने था सामना किया ?

देवत्वों के तब मौन अधर पर,
विजय-मन्त्र का स्वर मचला
करने लगे तभी सब वंदन,
हुए अभी थे वे सबला।

जय कल्याणी, जय महामाया,
तेरी कृपा है अपरम्पार,
तेरी शक्ति के आगे देवी,
नत मस्तक हम बारम्बार।

महिषासुरमर्दिनी! ने फिर,
देवों को वरदान दिया
जब भी मुझे पुकारोगे सब,
आऊँगी ये वादा किया।

इतना कह कर माता ने फिर,
उन सबको आशीष दिया।
अन्तर्ध्यान हुईं तब मइया,
देवों का उपकार किया॥