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दुर्गा मईया मेरे घर आओ

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…

हे दुर्गा मईया तो अब मेरे घर आओ, 
बिगड़ी बनाओ, दुखड़ा मिटाओ
नव रात्रि भर, मेरी भक्ति जगाओ, 
कंठ में मेरे सत्य उत्कंठ सुझाओ
हे दुर्गा मईया अब तो मेरे घर आओ।

घर को मन्दिर बनाओ हे दुर्गा मईया,
मन के विकार जलाओ, आओ हे मईया
शुद्धिकरण कराओ, हे मेरी मईया,
मेरी शक्ति दिखाओ, सुन मेरी मईया 
हे दुर्गा मईया अब तो मेरे घर आओ।

हे शेरा वाली माँ, तुम मेरे घर आओ,
नव रात्रि में हमें तुम जगाओ, आओ मेरी मईया
भक्ति की शक्ति बढ़ाओ, मईया तू मोरी, 
मैं अज्ञानी, मूरख जानी, ज्ञान के दीप जलाओ
हे शेरावाली, अन बुझ-सूझ मिटाओ, ओ मईया मोरी।

ओ मईया मोरी नारी शक्ति दिखाओ, हे शेरा वाली, 
अबला को सबल बनाओ, जगाओ मईया
घर-घर ज्योति जलाओ, ज्योत अखंड जलाओ मेरी प्यारी मईया, 
ज्वाला देवी बन दिखाओ, वैष्णव बन समझाओ
आओ मेरी मईया कलियुग में तुम आओ।

निहारूँ मईया, घूँघट में ही आओ, मेरी प्यारी मईया, 
शेर के संग तुम आओ, हमको दरश दिखाओ ओ मईया प्यारी
महालया में तुम आओ, नवमी तक तुम जगाओ ओ मईया मेरी, 
मेरे सुध की शुद्धि कराओ ओ मेरी मईया
माँ की ममता जगाओ, आओ मेरी मईया, अब तो मेरे घर आओ।

नर-भक्षी, गौ-भक्षी को मर्दनी रूप दिखाओ, 
भ्रष्टाचारी, दुराचारी को सत्य, ईमान बताओ
मईया मोरी अब तुम धरती पर आओ, हो मेरी मईया, 
नया वस्त्र, नव चेतन प्राणी हमें नव दुर्गा रूप दिखाओ वो मेरी मईया 
खुशी, उमंग लाओ, बरसाओ बरखा हथिया नक्षत्र में आ जाओ मईया। 

जन-जन को दरश दिखाओ हे मेरी मईया, 
चंडी रूप दिखाओ, शैल पुत्री, ब्रम्हचरिणी, चंद्र घंटा, कुस्मांडा मईया, स्कंद माता, कात्यायिनी। काल रात्रि, महागौरी, सिद्धि दात्री स्वरूप दिखाओ हे मईया मेरी, 
सुंदर मुखड़ा दिखाओ, फल खाओ मईया, अब तो मेरे घर आओ॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी  ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत,  कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ  कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”