प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
**************************************************
तुम दीन-दुःखी के रखवारे,
कल्याण करो हे! दया निधे
भव पार न कोई मुझे उबारे,
सन्ताप हरो हे! दया निधे।
तुम व्याप्त सकल हो अविनाशी,
तुम परम पिता घट-घट वासी
तेरी आस छोड़ कर जाऊँ कहाँ,
विश्वास बनो हे! दयानिधे।
तुम ही तो राम-रमैय्या हो,
तुम ही तो कृष्ण-कन्हैया हो
अब व्याकुल हृदय रहे तुम बिन,
उद्धार करो हे! दयानिधे।
जब तक तेरी पहचान हुई,
सब उम्र कटी शमशान हुई
अब जोत से जोत मिला लो प्रभु,
तव शरण गहो हे! दयानिधे।
तुम सत्य सनातन शक्ति प्रभु,
फूले बन मन में भक्ति प्रभु
मैं बिछुड़ा अंश तुम्हारा हूँ,
अब मुझे मिलो हे! दयानिधे।
मैं जन्मों-जन्म से भटकी हूँ,
इस भव सागर में अटकी हूँ।
अब और नहीं भटकाओ प्रभु,
मुझे दरश दे दो हे! दयानिधे॥