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‘डूबता जहाज’ पर हुई परिचर्चा

नार्वे।

पत्रिका ‘स्पाइल दर्पण’ ने परिचर्चा के रूप में डिजिटल कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें समालोचक व विभागाध्यक्ष (हिंदी, सम्राट विक्रम विवि उज्जैन) प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ की लघुकथा ‘डूबता जहाज’ वर्तमान परिस्थितियों पर व्यंग्य है। लघु कथाकार प्रो. अर्जुन चौहान ने ‘डूबता जहाज’ को नैतिक और आदर्श को स्थापित करने वाली साहसिक कथा बताया।
  सम्पादक कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड ने ‘डूबता जहाज’ को प्रासंगिक बताया और लिखित समीक्षा भेजी। इस अवसर पर हुई कवि गोष्ठी की शुरूआत में प्रमिला कौशिक ने सरस्वती वंदना तथा मीना मुरलीधरन ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। प्रसिद्ध कवि नीरज त्यागी एवं रामेश्वर दुबे, मीनू शर्मा एवं प्रमिला कौशिक आदि ने सस्वर कविता सुनायीं। डॉ. किरण आर्य, डॉ. सुखदेव वाजपेयी, सांद्रा लुटावन और नार्वे से सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ने अपनी कविताएं सुनायीं, सभी कविताओं को खूब पसंद किया गया।