स्मरणांजलि….
दिल्ली।
किसी कवि या साहित्यकार को याद किये जाने का सबसे अच्छा तरीका है उनके साहित्य को पढ़ना। ऋतुराज जैसे कवि कभी भी दृश्य से ओझल नहीं हो सकते, क्योंकि उनकी कविता में बहुत बड़ा संसार है।
यह बात सुपरिचित आलोचक और किरोड़ीमल कालेज में हिंदी आचार्य डॉ. नामदेव ने ऋतुराज की स्मृति में आयोजित सभा में कही। हिंदी साहित्य सभा द्वारा आयोजित इस स्मरणांजलि सभा ‘अलविदा ऋतुराज’ में ऋतुराज के कविता संग्रहों ‘मैं आंगिरस’, ‘एक मरणधर्मा और अन्य’ आदि का उल्लेख भी आपने किया।
दिल्ली विवि के हिंदी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. दीपक जायसवाल ने कहा कि ऋतुराज कविता में अपनी राह खुद बनाते और संवारते हैं। उन्हें बने बनाए रास्तों पर चलना स्वीकार नहीं था।
हिंदी विभाग की वरिष्ठ आचार्य प्रो. रचना सिंह और डॉ. रुपाली सिन्हा ने उनकी कविताओं का पाठ किया। विभाग के आचार्य प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि भले ही जीवन के ताप और संघर्षों को ऋतुराज की कविता मुख्य स्वर बनाती है, तथापि प्रेम और कोमल भावनाओं के लिए भी उनके यहां भरपूर स्थान है।
विभाग प्रभारी प्रो. पल्लव ने अतिथियों का स्वागत किया और ऋतुराज का विस्तृत परिचय दिया।
सभा के अध्यक्ष विनीत खुराना ने संयोजन तथा धन्यवाद ज्ञापित किया।