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प्रेम मेरे दिल में

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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करवाचौथ विशेष….

प्रेम मन में लिए घर में रहा करूँ,
सबने किया व्रत करवाचौथ।

प्रेम मेरे दिल में, प्रेम ही संसार मेरा,
पिया के घर में बस, प्रेम ही जिया करूँ।

ना जानूँ कोई कर्मकांड, उपवास किया ना कभी,
मुश्किल भरे जीवन में सदा मुस्कुराते रहूँ।

साथ रहूँ तेरे संग, पिया की दीवानी बनूं,
ना वस्त्र की ख्वाहिश, न सोने-चाँदी की चमक।

प्रेम दिल में लिए घर-संसार सजती रहूँ,
काम-धाम से ना फुर्सत मिले, कैसे पूजा-पाठ करूँ।

सबको देखूं सजे-धजे, पिया रहे बस मन में मेरे,
इस जीवन पिया की दीवानी, क्या जानूँ कोई उपवास-व्रत।

हमको मिल जाए अपने कर्मों का यहाँ फल,
अच्छा या बुरा, सब कर्मों का खेल।

राधा-राधा नाम रटूँ, महादेव का जाप करूँ,
ना करूँ कोई उपवास, बस पिया से प्रेम अपार॥