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बाल साहित्य शोध सृजन पीठ ने शाला में सिखाया रचनात्मक लेखन

भोपाल (मप्र)।

नव निकेतन हायर सेकंडरी विद्यालय, करोंद में बाल साहित्य शोध सृजन पीठ (साहित्य अकादमी, मप्र) के तत्वावधान में रचनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों को विभिन्न विषय देकर उनसे स्वयं बाल-कहानियाँ लिखवाई गईं।     
   इसका शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। प्रारम्भ में बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक डॉ. मीनू पांडेय ने स्वागत उद्बोधन देते हुए रचनात्मक लेखन की अवधारणा, उसके विभिन्न प्रकारों एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि रचनात्मक लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण एम्प्लॉयबिलिटी स्किल भी है, जो कल्पनाशक्ति, भाषा-कौशल, संप्रेषण क्षमता, चिंतन एवं समस्या-समाधान जैसे गुणों के विकास में सहायक है।
   अतिथि वक्ता कविता शिरोले ने कहानी लेखन की विधा पर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए बताया कि बाल-कहानी लिखते समय विषय, कथानक, पात्र, भाषा, संवाद और रोचकता जैसे तत्वों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कुछ प्रमुख बाल कहानियों का रोचक वाचन भी किया। इसके बाद विद्यार्थियों को विभिन्न विषय देकर उनसे बाल-कहानियाँ लिखवाई गईं।
द्वितीय अतिथि वक्ता राजेन्द्र गट्टानी ने कविता की प्रकृति एवं रचना-प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कविता के आवश्यक तत्वों, भाव, कल्पना, लय, भाषा एवं अभिव्यक्ति के संबंध में विद्यार्थियों को उपयोगी जानकारी दी। कुछ चुनिंदा बाल कविताओं का पाठ करते हुए उनसे बाल-कविताएँ लिखवाईं।
कार्यशाला के अगले चरण में शाला प्रमुख राजेन्द्र चौहान ने रचनात्मक लेखन को केवल कार्यशाला तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
  तत्पश्चात सक्रिय सहभागिता करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र दिए गए।
डॉ. पांडेय ने सफल आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया।