राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड)
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आज सबकी नजरें थीं रब पर,
आश मातृत्व की थी जग पर
इंतजार था हमें उस डॉक्टर का,
आते ही सन्देश दे हमें संतान का।
पल-पल लगता सदियाँ बीत गई,
तकते-तकते हमारी आँखें थक गई
लम्बे इंतजार के बाद निकले डॉक्टर,
‘बधाई हो बेटी हुई’ कहा उसने हँस कर।
सुनते ही आँसू खुशी के छलक गए,
वरदान मिला रब से, खुशी से उछल गए
‘लक्ष्मी’ के रूप में आई घर में मेरी बेटी,
मन नाचने लगा चढ़कर खुशियों की चोटी।
घर में शहनाई बज उठी है,
आँगन में चाँद उतर आया है
नन्हें कदमों की आहटों ने,
सारा आँगन महकाया है।
बेटी मेरी पिता की उंगली पकड़ चलेगी,
कल साड़ी में माँ की, लिपटकर सोएगी
उसके हँसने से घर मेरा महकेगा,
उसके ही कारण भाग्य मेरा चहकेगा।
बिटिया मेरी बोलेगी जब मुझे ‘पापा’,
लगेगा जैसे मन को अमृत मिल गया
माँ के आँचल में छुपकर जब रूठेगी,
लगेगा पुनः मुझे बचपन मिल गया।
पढ़-लिख कर जग में आगे बढ़ेगी,
ख्वाब जो मेरा रह गया है अधूरा
अफसर बनकर करेगी वह पूरा,
लोक ही नहीं, परलोक संवारेगी हमारा।
पर डोली में बैठ एक दिन विदा हो जाएगी,
घर-आँगन मेरा फिर सूना हो जाएगा
पर फोन पर पूछेगी ‘कैसे हो बेटा’,
उस पल दिल को सुकून आ जाएगा।
कहता ‘राजू’ बेटियाँ नहीं है बोझ जग में,
इसका तुम बस सम्मान और गुणगान करो।
बेटी आई, बेटी आई, नाचो-गाओ खुशी मनाओ,
बेटी आई, बेटी आई, हर्ष से तुम जग को बताओ॥
परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।