राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड)
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भाई-बहन का त्योहार है करमा,
बड़ा ही नेक, बड़ा ही सुन्दर भाव
इसमें दिखता है बहनों का कर्म,
छिपा है यहाँ सभी भाई का धर्म।
सप्ताहभर का है यह पावन त्योहार,
पहले दिन बहनें डाली में जावा बुनती
फिर चारों ओर इसके नाचती-गाती,
भाई भी ढोल-मांदर से देते हैं साथ।
जब जावा अंकुरित होता, खुशी आती है,
करम राजा की कृपा से, झोली भर जाती है
बहनें, भाई के मंगल की कामना गाती हैं,
भाई भी उनकी रक्षा का संकल्प दोहराते हैं।
कहता राजू – भाई-बहन का त्योहार करमा,
देता हमें प्यार, खुशहाली, समृद्धि का संदेश।
प्रकृति-हरियाली से भी गहरा नाता है इसका,
तभी तो कहलाए ‘करमा’ सब पर्वों से विशेष॥
परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।