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माँ भवानी

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…

ज़िन्दगी वीरान है, खुशियाँ भी कहीं गुम हैं,
दिन भी हर पल दर्द से भरा है
रातों की चाँदनी भी कहीं गुम है,
माँ भवानी अब तो दर्शन दे दो मुझको।

अपना सहारा देकर धन्य कर दो मुझको,
माँ भवानी तुम बस मुझको अपना आशीष दे दो
खुशियों से भर जाएगी जीवन की तरंग,
हमारी भाग्य रेखा भी तुम बदल दोगी।

मुझे है यकीन बस तेरी कृपा मुझ पर पड़ जाए एक बार,
प्रेम से जीवन भर जाएगा
माँ भवानी बस तुम हर जन्म में मिलती रहो,
मौन में हो या फिर संवाद हो।

हर जख्म माँ मेरा तुम भर दोगी,
गीत गाता रहे, मन बस तेरा
तुम मेरी ज़िंदगी में सदा बसती रहो माँ,
मैं तेरी बेटी दुखियारी, जग ने छोड़ा।

बस तेरा ही अब सहारा रह गया है माँ,
विनती मेरी सुन लो माँ।
चुप क्यों हो कुछ तो बोलो माँ,
बस तेरा सहारा रह गया है माँ॥