पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
***********************************
आजकल युवाओं में धूम्रपान और अन्य तरह के नशे का आकर्षण चिंताजनक रूप से बढ़ता जा रहा है। इन किशोर एवं युवा बच्चों को इस तरह की हर चीज एक क्लिक पर मिल जाती है। ऐसी स्थिति में उनके मन में धैर्य और संयम जैसे शब्दों का उनके शब्दकोष में कोई स्थान नहीं होता। जरा-सी निराशा इनके लिए जीवन की सबसे बड़ी असफलता लगने लगती है।
युवा अपने दोस्तों के सामने अच्छा दिखने के लिए देर रात की पार्टीज में मस्ती हेतु सिगरेट, शराब और ड्रग्स ले रहे हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण सोशल मीडिया, पिक्चर या वेबसीरिज में इसको अत्यंत आकर्षक बना कर दिखाना है। दूसरों के सामने अपने को बहुत मॉडर्न दिखाना, कई बार परिवार में किसी सदस्य को धूम्रपान या नशा करते देखना, तनाव और भावनात्मक अकेलापन, पॉकेटमनी से आसानी से सुलभ होना, छिपकर इस्तेमाल करने की सुविधा, छोटे पैकेट्स की उपलब्धता एवं कोई साथी नशा करता हो आदि भी है।
विद्यालय-महाविद्यालय के आसपास की दुकानों पर सिगरेट, वेपिंग डिवाइस, ड्रग्स आदि की आसान उपलब्धता किशोरों को इनकी लत की ओर ढकेलती है। ये छोटी दुकानें टीन एजर्स और किशोरों को नशे के जाल में फँसाने का आसान माध्यम बन रही हैं।
धूम्रपान और नशे के कारण फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक और कमजोर इम्यून सिस्टम आदि बीमारियाँ युवाओं में पैर पसार रहीं हैं। माता-पिता यदि धूम्रपान या नशा करते हैं तो आपको अपने बच्चों के भविष्य के लिए स्वयं पर काबू पाना होगा।यदि आप नशा करते हैं, तो आप किशोर को मना नहीं कर पाएंगें।
आप अपने किशोर बच्चे के साथ खुला संवाद करें और उसको डराने की बजाय तथ्यात्मक जानकारी दें।
तनाव, विफलता या रिश्तों की समस्याओं के कारण अक्सर किशोर गलत रास्तों पर चल पड़ते हैं। उस समय बच्चों की भावनाओं को समझ कर उन्हें भावनात्मक सहारा दें।
सोशल मीडिया पर किशोर क्या देख रहे हैं, किन समूहों से जुड़े हुए हैं, इस पर भी निगरानी रखें।बातचीत के जरिए बच्चों को दोस्तों की गलत बातों में ‘ना’ कहना सिखाएं।
नशे के कारण व्यवहार में बदलाव या पैसे की ज्यादा माँग और समय रहते पहचानना ही सबसे बड़ा बचाव है। शाला-महाविद्यालय में युवाओं को नशे के दुष्परिणाम के प्रति जागरूक करने का प्रयास करें, क्योंकि केवल पढ़ाई की ही नहीं, वरन् उनकी जिम्मेदारी व्यक्तित्व निर्माण की भी है। महाविद्यालय परिसर के अंदर धूम्रपान या नशे वगैरह के प्रयोग पर स्पष्ट नियमावली होनी चाहिए, जो सबके लिए हो और सख्ती से पालन किया जाए।
हमें यह समझने की जरूरत है, कि धूम्रपान व्यक्तिगत आदत से ज्यादा सामाजिक समस्या है। किसी भी नशे की लत को छोड़ना कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। इसलिए अपने जीवन से नशे को हमेशा के लिए भूल जाओ और स्वस्थ जीवन जियो।