कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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११ अगस्त १९४२ की वह शाम,
वह शाम थी या स्वतंत्रता का वरदान
हर शाम की तरह वह शाम भी आई,
पर सात सपूतों ने हँसते-हँसते भारत माँ के चरणों में दे दी कुर्बानी,
लिख गए शहादत की अमर कहानी।
उनकी याद में सचिवालय के पूर्वी गेट पर अमर शहीद स्मारक का निर्माण हुआ,
आज भी हम शीश झुकाते हैं उन वीर बलिदानियों की कुर्बानी पर।
शहीद उमाकांत प्रसाद सिंह ‘रमन जी’-
जन्म १९२२ में राम मोहनपुर, सारण में हुआ,
मध्यम वर्गीय परिवार के पुत्र थे अगस्त के महीने में कूद पड़े स्वतंत्रता संग्राम में,
गोलियों की परवाह न की और २० वर्ष की आयु में शहीद हो गए
देश को गर्व है ऐसे वीर पुत्र पर।
शहीद रामानंद सिंह-
‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से प्रभावित, ११वीं के छात्र थे,
सचिवालय के पूर्वी गेट पर अपना प्यारा तिरंगा फहराने गए
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर गोली चली और सीने पर लगी,
आज भी रामानंद सिंह के गाँव में स्कूल उनके नाम पर है
वे सबके प्रेरणा स्रोत हैं।
शहीद सतीश प्रसाद झा-
बचपन से बड़े चंचल, स्वतंत्रता की चिंगारी बचपन से ही प्रज्वलित थी, ‘रघुपति राघव राजा राम’ के पाठ से प्रभावित थे
११ अगस्त १९४२ को ही भारत माँ की गोद में सदा के लिए सो गए,
हम युग-युग तक उनके त्याग को याद करेंगे।
शहीद जगपति कुमार-
जन्म औरंगाबाद में हुआ,
११ अगस्त को राष्ट्रीय तिरंगा फहराने सचिवालय पहुँचे
जन-समूह के साथ गोलीकांड में उनकी कुर्बानी हो गई,
उनकी माता देशभक्ति की प्रतिमूर्ति थीं
जो सदा मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित करती थीं।
शहीद देवीपद चौधरी-
पिता-पुत्र साथ गए थे झंडा फहराने,
पिता घायल होकर बचे, पर पुत्र ने देश के लिए बलिदान दे दिया
आज भी हम हर पल उनका नाम लेते हैं।
शहीद राजेन्द्र सिंह-
बस एक ही संकल्प था-सचिवालय भवन पर झंडा फहराना,
जिला मजिस्ट्रेट नहीं माना, गोली चल गई
और राजेन्द्र सिंह भी उन सात शहीदों में शहीद हो गए,
सोनपुर-छपरा मुख्य सड़क किनारे उनकी मूर्ति आज भी गर्व से स्थापित है।
शहीद रामगोविंद सिंह-
घर के बड़े लाडले थे,
महात्मा गांधी, खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे नेताओं के प्रवचनों से उनके मन में देशभक्ति का दीप जला।
सात शहीदों की इस कुर्बानी ने,
हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को नया आयाम दिया
और अंततः १९४७ में हमें आज़ादी मिली।
जोश था, जुनून था, पक्का इरादा था,
न डरे, न झुके, बस झंडा फहराया और हो गए कुर्बान।
हम याद करेंगे वीर पुत्रों को, कभी न भूलेंगे उनकी कुर्बानी,
जय हिंद, जय भारत की यही कहानी॥