नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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हर कण में बसती है, जिसका प्रकाश निराला,
देवभाषा बनकर जग को देती उजियाला।
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा, देती नई आशा,
सरल, सुकोमल, मधुर है इसकी भाषा।
यह हमारी संस्कृति का दर्पण, गौरव और सम्मान,
हिंदी से ही जुड़ी हुई है भारत की पहचान।
मन में हिंदी के प्रति प्रेम जगाएँ, अपनी भाषा का मान बढ़ाएँ।
हिंदी एक विश्वास है, भाषाओं का आधार,
विभिन्न भाषाओं को जोड़ती, करती सबका सत्कार।
मातृभाषा बनकर मन में मधुरता भरती,
भारत की एकता को और मजबूत करती।
हिंदी सरल है, इसका प्रयोग बढ़ाएँ,
मिलकर हिंदी दिवस मनाएँ।
हिंदी साहित्य, विज्ञान और कला की शान,
हिंदी का सम्मान बढ़ाना हम सबका अरमान॥