डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’
सोलन (हिमाचल प्रदेश)
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सतरंगी दुनिया-३७…
ईमानदारी से काम करने वालों के शौक भले पूरे ना हों, लेकिन नींद जरूर पूरी होती है। पैसा सिर्फ आपकी लाईफ-स्टाईल बदल सकता है- दिमाग, नीयत और किस्मत नहीं। इस दुनिया में आपकी कद्र तब तक है, जब तक आप किसी की जरूरत बने रहते हैं। जिस दिन जरूरत खत्म हो जाती है, उस दिन कई रिश्तों का असली रंग भी सामने आ जाता है। हमारी पड़ोसन ने अपने घर में एक बोर्ड लगा रखा था, जिस पर लिखा था- कृपया अपनी चप्पलों के साथ-साथ अपनी गलत सोच… गलत हरकत… सास-बहू… देवरानी-जेठानी और ननद की चुगली… बाहर ही उतार कर आएं और एक महत्वपूर्ण बात- अपनी तिरछी नजरों से मेरे पति को ना देखें, वो बहुत सीधे हैं; किसी के भी बहकावे में आ जाते हैं।
हमें वो ही लोग अच्छे लगते हैं, जो हमारी हाँ में हाँ मिलाते हैं। जो सही को सही और गलत को गलत बोलते हैं, ऐसे लोग सबकी आँखों में चुभते हैं। एक बात का ध्यान रखिए कि आपके साथ मुस्कराने वाला हर व्यकि आपका शुभचिंतक नहीं होता है। जीवन हमें कठिन तब लगता है, जब हम ‘स्वयं’ को बदलने की बजाय परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करते हैं। जो हमको मिला है, उसमें हमें सुकून ढूँढना चाहिए, क्योंकि जो नहीं मिला है, वो तो हमेशा दर्द देता रहेगा। कभी इतने मासूम थे कि हर चीज पर भरोसा रखते थे। आज इतना तजुर्बा है कि अब सच्चाई पर भी आसानी से यकीन नहीं होता है। घर के बड़ों से मशवरे लीजिए, नहीं तो बाद में वकीलों से मशवरे की जरूरत पड़ जाएगी।
कमाल का हौसला दिया है भगवान ने शादी-शुदा मर्दों को, जब बीबी कहती है ‘भाड़’ में जाओ तो आफिस चला जाता है और जब बॉस कहता है कि जहन्नुम में जाओ तो तब वो घर चला आता है। बीवी आखिर बीवी होती है, किसी भी हालत में शक करना नहीं छोड़ती- एक कैदी जेल से फरार होकर अपने घर पहुंचा और घंटी बजाई। बीवी ने दरवाजा खोला और सामने अपने पति को देखकर बोली- टी.वी. पर तो खबर आ रही थी कि आपको जेल से फरार हुए ८ घंटे हो गए हैं, कहाँ थे इतनी देर आप ? पति पलट कर भागा और जेल में जाकर सरेंडर कर दिया।
बीड़ी पीने के बाद लोग उसे जूते से ऐसे मसलते हैं, जैसे बीड़ी उनके खिलाफ कोर्ट में गवाही देने वाली हो। अगर भीड़ में सबका सिर झुका है, परन्तु आपका सिर नहीं झुका है तो मतलब साफ है कि आपका इंटरनेट काम नहीं कर रहा है। इस दुनिया में सबसे ज्यादा बेशर्म पेट है, क्योंकि पेट के अंदर सब कुछ चला जाता है;बस पेट अंदर नहीं जाता है। अजीब दुविधा में हूँ, सैलरी कम बताऊं तो रिश्तेदार इज्जत नहीं करते हैं और अगर ज्यादा बताऊं तो तो उधार मांगने आ जाते हैं। मुझे समझ नहीं आता, कि अपनी इज्जत बचाऊं या पैसे।
किसी पे भरोसा करते वक्त एक बात ध्यान रखिए कि फिटकरी और मिश्री बाहर से एक जैसी दिखाई देती है। दुनिया में रहना है तो पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन उसके लिए इतना तनाव मत पालिए कि सारा पैसा दवाइयों पर खत्म हो जाए। पैसे से ज्यादा कीमती आपकी नींद, स्वास्थ्य और सुकून है। अगर लोग आपसे खुश नहीं हैं तो उसकी चिंता आप ना करें, क्योंकि आप यहाँ किसी का मनोरंजन करने नहीं; बल्कि अपनी ज़िंदगी बनाने आए हो। हमेशा बड़े सपने चुनिए और दर्द का आनंद लीजिए, क्योंकि सुकून मुर्दों पर जंचता है;मर्दों पर नहीं। लड़कियों के कान सिर्फ झुमके पहनने के लिए हैं, क्योंकि ये सुनती तो किसी की भी नहीं है। कुछ लोग जी.एस.टी. का उपयोग बचपन से ही करते आ रहे हैं। सामान लाते थे १५ रूपए का और घर पर बताते थे २० रुपएl। डॉक्टर कहते हैं कि फल, सब्जी खाओ, कभी दवाई नहीं खाना पढ़ेगी, मगर उनको कौन बताए कि फल और सब्जी स्वयं दवाई खाकर बाजार में आ रहे हैं।
काश! आरक्षण का असर बारिश पर भी आ जाए।
जनता के घर पानी गिरे, नेता के पर बादल फट जाए।
परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई पता हिमाचल प्रदेश ही है। सिंधी,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले डॉ. मोहन ने बीएससी सहित आर.एम.पी.,एन. डी.,बी.ई.एम.एस., एम.ए., एल.एल.बी.,सी. एच.आर.,सी.ए.एफ.ई. तथा एम.पी.ए. की शिक्षा भी प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र में दवा व्यवसायी ‘भारतीय’ सामाजिक गतिविधि में सिंधी भाषा-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रचार करने सहित थैलेसीमिया बीमारी के प्रति समाज में जागृति फैलाते हैं। इनकी लेखन विधा-क्षणिका, व्यंग्य लेख एवं ग़ज़ल है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। ‘उजाले की ओर’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित है। आपको राजस्थान से ‘काव्य कलपज्ञ’,उ.प्र. द्वारा ‘हिन्दी भूषण श्री’ की उपाधि एवं हि.प्र. से ‘सुमेधा श्री २०१९’ सम्मान दिया गया है। विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अध्यक्ष (सिंधुडी संस्था)होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य का सृजन करना है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणापुंज-प्रो. सत्यनारायण अग्रवाल हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले,हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को हम हिंदी भाषा का ज्ञान दें, ताकि हिंदी भाषा का समुचित विकास हो सके |