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हकीकत हर शहर की

वंदना जैन
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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यह शहर जागता सोता-सा है,
ट्रेनें दौड़ लगा रही हैं
लाइटें जाग रही हैं,
बसें थकी-थकी सी लड़खड़ा रही हैं
कारखानों में नाईट ड्यूटी अपना पेट पाल रही हैं,
दवा की दुकानें खुली हैं।

मुलायम गद्दों पर कुछ लोग करवटें ले रहे हैं,
फुटपाथ पर सोने वाले
मच्छरों से खुद को कटवाकर,
कुत्तों संग चैन से सो रहे हैं।

कुछ अपराधी निडरता का,
चोला पहन बहार निकले हैं
साँठ-गाँठ की जोड़-तोड़ हो रही है,
सवेरे इसी जोड़-तोड़ का शोर-शराबा होगा,
जो लेन-देन पर समाप्त होगा।

कुछ अपराध दिन के उजाले में होते हैं,
जो रोशनी में भी दिखाई नहीं देते
अंधेरों के अपराधियों की अदालत दिन में लगेगी,
दिन के अपराधी ईश्वर की अदालत में
स्वयं को निरपराध घोषित करने के लिए,
मंदिरों में अर्जियों का चढ़ावा चढ़ाएंगे
और मासूमियत की सफेद चादर ओढ़ कर,
बैनरों में मुस्कुराते हुए नजर आएंगे
पर एक अदालत और है,
ऊपर की अदालत।
सब जानते हैं,
परन्तु कुछ लोग मानते नहीं॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’