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फागुन की मस्ती…

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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वसंत की बहार के बाद,
रंग-बिरंगा सा मौसम आया
जिसने दुश्मनों को भी दोस्त बनाया,
यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है।

झूमते-नाचते ढोलक की थाप पर,
चाहे वनवासी हो, या शहरवासी
सब मस्त हैं, मौसम का ऐसा जादू छाया,
यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है।

गली-मोहल्लों में फाग के गीतों का गुणगान सुन रहे सब,
कहीं हँसी-ठिठोली है, कहीं सात सुरों की बोली
राधा-कृष्ण के साथ यह फूलों की वर्षा का मौसम,
यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है।

अब प्रकृति भी आनंद में है,
रंगों भरा है यह सतरंगी आसमान।
धरती पर उल्लास, उमंगता व उत्सव का रंग छाया है,
यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है॥