हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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वह ‘सोंधी’-सी महक,
तुलसी के इस घर ‘आंगन’ में
रोशनी की ‘ज्योति’ है बेटियाँ,
वह ‘खुशियों’ का सागर है।
हर घर की आन, बान और शान है वह,
उनकी ‘मुस्कान’ हमारे घरों का सुख-चैन है
‘ईश्वर’ ने भी उन्हें वहीं भेजा होता है,
जिससे वह ‘खुश’ होता है, बेटियाँ ‘खुशियों’ का सागर है।
बेटियाँ खुदा की और से भेजा हुआ ‘अनमोल’ तोहफा है,
उनके ‘शुभ’ चरणों से हमारे घर परिवारों में ‘सुकून’ है
वह दो परिवारों का ‘सेतु’ बन ‘खुशियाँ’ ही बाँटती है।
अपनों के दु:ख-सुख में वह सबसे आगे रहती है,
बेटियाँ ‘खुशियों’ का सागर है॥