कुल पृष्ठ दर्शन : 4

‘स्त्री’ देती जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
*****************************************

‘स्त्री’,
धरा समान
करना नहीं तिरस्कार,
देती जीवन
वरदान।

‘नारी’,
जन्म संतान
पालन-पोषण करती,
भू समान
अभिभावक।

‘औरत’,
जगत पहचान
करती जीवन संघर्ष,
चुप रहती
पुष्प।

‘महिला’,
कोमल मन
वक़्त पर मैदान,
भिड़ जाती
रक्षा।

‘वनिता’,
दुर्गा, काली
नहीं निर्बल-अबला,
कभी ‘कामिनी’
जानकी।

‘रमणी’,
संस्कृति वाहक
करती सदा भला,
सृजन धुरी
संवेदनशील।

‘भार्या’,
साथ चलती
प्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,
उड़ाती विमान
सफलता।

‘जननी’,
करती भागीदारी
निभाती हर परम्परा,
रूप शक्ति
परिवार।

‘कांता’,
सौन्दर्य-लक्ष्मी
लुटाती ममता अपार,
दर्द सहती
मुस्कान।

‘अर्धांगिनी’,
कहलाती माँ
पर रहती पीड़ित,
अनेक भेदभाव
विडम्बना।

‘मानवी’,
सम्भालती घर
है रूप शक्ति,
रखती उदारता,
देवी।

‘त्रिया’,
आत्मीयता चरित्र
दिखाती मन अपनापन,
कम में प्रेम
स्वाभिमान।

‘अबला’,
समझती दुनिया
लड़ती घर वास्ते,
फ़िक्र सबकी
आँसू।

‘गृहिणी’,
निभाती जिम्मेदारी
रखती बड़ा आँचल,
मातृ शक्ति
साहस।

‘वल्लभा’,
हरपल आगे
पुरुष के साथ,
आसमान चीरती
बढ़ाओ।

‘सहधर्मिणी’,
सम्मान दो
रिश्ता हृदय का।
साथ चलो,
कदम॥