ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…
मैं नारी हूँ,
मत करना अपमान
मैं ही जीवनदायिनी,
मैं हूँ एक वरदान।
मैं नारी हूँ,
माँ बनकर देती संतान,
पालन-पोषण मैं करती,
मैं हूँ वृक्ष समान।
मैं नारी हूँ,
भारत की पहचान
यमराज से भी छीन लाती,
जो अपने पति के प्राण।
मैं नारी हूँ,
कोमल फूल समान,
वक़्त पड़े तो थाम लूँ,
बरछी, तीर-कमान।
मैं नारी हूँ,
निर्बल-अबला मत जान।
अपनी रक्षा कर लेती हूँ,
बनकर दुर्गा, काली, तूफ़ान॥