कुल पृष्ठ दर्शन : 1

आ गया नव संवत्सर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
*******************************************

नव संवत्सर आ गया, गाने मंगल गीत।
प्रियवर अब दिल में सजे, केवल नूतन जीत॥

चैत्र महीना प्रतिपदा, जो लाया उजियार।
यही हमारा वर्ष है, विजय करे श्रंगार॥

ब्रम्हा जी ने सृष्टि का, किया नवल- निर्माण।
शुक्ल पक्ष तो सोहता, मौसम में नव प्राण॥

उज्जयिनी महाराज ने, देकर चोखा काल।
मंगलमय गणना शुरू, भारत हुआ निहाल॥

संवत्सर कितना शुभम्, देता सबको नेह !
अंतर इसका आसमय, उल्लासित है देह॥

फिर से नव संकल्प हो, फिर से नव उत्थान।
हिन्दू होने की खुशी, जयति जय नव गान॥

नया वर्ष ले आ गया, नया शौर्य, नव ताप !
संस्कारों के वेग को, कौन सकेगा माप॥

राज विक्रमादित्य ने, दिया हमें नव वर्ष!
आगे हम बढ़ते रहें, धारण करके हर्ष॥

चैत्र प्रतिपदा मांगलिक, बाँँट रही उत्साह।
बात तभी बन पायगी, बनो वक़्त के शाह॥

दोस्त, मित्र, बंधू, सखा, रक्खो सँग नववर्ष।
मिले तुम्हें खुशियाँ ‘शरद’, मिले सुखद जीतो हर संघर्ष॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।