कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती विशेष…
मन में इच्छा आँखों में चमक,
श्यामला रंग आँखों पर चश्मा कद था छोटा
१४ अप्रैल १८९१ को जन्म लिया था, महार जाति का था,
नाम था जिसका भीम सकपाल।
भेदभाव, सामाजिक रीति-रिवाज,
सबको बदलने चला था वह बच्चा महान
ना कोई पढ़ने देता उन्हें, पर वह न हारे,
कर दृढ़ निश्चय किया, पढ़ाई बस पढ़ाई।
अछूत जानकर सब दुत्कारे,
कक्षा के बाहर खड़े हो कर पूरी की पढ़ाई
पानी भी न पीने दे कोई,
माँ के थे लाड़ले, पिता का गुरूर।
आँखों में बस एक ही सपना संजोया,
दिलाना है सबको न्याय
हर परिस्थिति स्वीकार कर संघर्ष किया,
अछूतों, पीड़ितों, पिछड़ों, महिलाओं को न्याय दिलाया।
तमाम बाधाओं को तोड़
‘मूकनायक’ समाचार-पत्र चलाया,
स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने
उनका था बस एक ही नारा,
शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।
लोगों ने अछूत समझ कर किया जिसका तिरस्कार,
वही भीमराव बने संविधान के जनक।
अंत समय बौद्ध धर्म को अपनाया,
जग को विचार का मार्ग दिखाया॥