अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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आज भी राहुल रोज की तरह जल्दी उठा। माँ ने कहा—
“बेटा, आज मोहल्ले में सफाई अभियान है, तुम भी चले जाओ।”
मुँह बनाते हुए जवाब दिया—
“माँ मुझे क्या मतलब इस गंदगी से ? ये काम तो सफाई वालों का है।”
और तैयार होकर बाहर निकल गया।
गली में कचरे का ढेर था, जिससे बदबू फैल रही थी, पर राहुल ने नाक सिकोड़ ली।
कुछ दूर जाकर वह एक बड़े मॉल में पहुँचा। अंदर चमचमाता फर्श, साफ-सुथरा माहौल देखकर उसने चैन की साँस ली, पर वॉशरूम में हाथ धोने गया तो दर्पण पर लिखा था—
“साफ जगह सबको पसंद है, पर उसे साफ रखने की जिम्मेदारी कौन लेगा ?”
राहुल खुद को देखता रहा… फिर चुपचाप लौटकर उसी बदबू वाली गली की ओर चल पड़ा।