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नई राह दिखलाऊं

ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…

मन करता है सूरज जैसे,
मैं भी प्रकाश फैलाऊं
भूले भटके लोगों को,
नई राह दिखलाऊं।

मन करता है चाँद जैसे,
मैं भी शीतलता पाऊं
गुस्से पर काबू करना,
सबको मैं सिखलाऊं।

मन करता है बादल जैसे,
मैं भी बरस जाऊं
सूखी धरती पर थोड़ी,
हरियाली मैं फैलाऊं।

मन करता है कोयल जैसे,
मैं भी मीठे गाना गाऊं
अशांत मन से घिरे है जो,
उनको शांति दे जाऊं।

मन करता है तितली जैसे,
मैं भी थोड़ी इठलाऊं।
दुखियों के दुख हर कर,
दूर कहीं उड़ जाऊं॥