कुल पृष्ठ दर्शन :

मेहनत के हाथ

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
*************************************

मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)….

ईंटों में धड़कन है, लोहे में जान है, 
उसके पसीने से ही तो देश की शान है
न सुबह देखी उसने, न शाम का आराम,  
मजदूर के हाथों से बनता है हिंदुस्तान।

ऊँची इमारतें जब आसमां को छूती हैं,  
नींव में किसी की हड्डियाँ टूटी हैं
सड़कें जो शहरों को जोड़ती हैं रोज,
उन पर किसी के छाले पड़े हैं बेरोज।

न टाई है, न कोट है, न एसी का कमरा,  
धूप में तपकर भी वो करता नहीं झगड़ा
टैंक बनाता है वो, पुल बनाता है वो,
पसीने से सींचकर गुलशन खिलाता है वो।  

अफ़सर भी साइन तभी करता है
जब मजदूर वेल्डिंग सही करता है 
तो आज सलाम है उन हाथों को,  
जिनमें छाले हैं पर कभी थकान नहीं।  

मजदूर है तो रोटी है, मजदूर है तो जान है,  
मजदूर है तभी तो देश महान है।
जिस टैंक को हम ‘सेफ फॉर यूज’ लिखते हैं,
उसे किसी मजदूर ने ही वेल्ड किया है। 

पेपर साइन करने से पहले,
एक बार मज़दूर ‘शाबाश’ ज़रूर बोलना है 
किसी भी रुल में ये नहीं लिखा, 
पर इंसानियत में लिखा है।

‘१ मई’ बस तारीख नहीं, एक एहसान है,  
मजदूर दिवस – मेहनत का सम्मान है।
उसका सम्मान ही हमारी ज़िम्मेदारी है,
क्योंकि उसकी भी सबमें भागीदारी है॥