कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…
सीमा पर फिर गर्जन गूंजा, रण का नभ अंगार हुआ,
भारत माँ के वीर सपूतों का फिर जयघोष अपार हुआ
माथे का सिंदूर बचाने निकली जब रणभेरी थी,
भारतीय सेना की गाथा तब इतिहासों से गहरी थी।
हिमगिरि की चोटी से लेकर मरुभूमि के विस्तार तलक,
हर सैनिक ने प्राण जलाए भारत माँ के सत्कार तलक
सीने पर गोली खाकर भी जिसने ध्वज न झुकने दिया,
उन वीरों की अमर तपस्या ने भारत को रुकने न दिया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना अब साहस का अभिनव अभियान,
माँ-बहनों के गौरव रक्षा का यह पावन हिन्दुस्तान
रक्त नहीं वह बहता केवल, वीरों का अभिमान बहा,
हर शहादत के संग भारत का गौरवमय सम्मान बहा।
मिट्टी की सौंधी खुशबू में वीरों का बलिदान बसा,
हर सीमा के कण-कण में भारत का स्वाभिमान बसा
‘तिरंगा ऊँचा रहे सदा’ यह संकल्प जवानों का है,
भारत माता की रक्षा ही जीवन का वरदानों का है।
आओ हम भी शीश नवाकर वीरों का सम्मान करें,
उनके अद्भुत त्याग-तपस्या का मिलकर गुणगान करें।
जब तक गंगा बहती होगी, जब तक नभ में सूरज है,
भारतीय सेना का गौरव तब तक जग में पूज्य रहेगा॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।