नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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धरती के भगवान….
चिकित्सक (डॉक्टर) को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है, क्योंकि भगवान स्वयं हर स्थान पर उपस्थित नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में चिकित्सक को धरती पर भेजा है। इसी कारण चिकित्सक को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है। सफेद कोट और गले में स्टेथोस्कोप उनकी पहचान है।
एक चिकित्सक का जीवन सेवा-भावना से जुड़ा होता है। उनके चेहरे पर सदैव मधुर मुस्कान रहती है। वे प्रत्येक रोगी का ममता और स्नेह की दृष्टि से ध्यान रखते हैं। उनकी मीठी वाणी और स्नेहपूर्ण व्यवहार से रोगी की आधी बीमारी तो वैसे ही दूर हो जाती है। वे निःस्वार्थ भाव से मानव सेवा करते हैं। वे रोगियों का जीवन बचाते हैं और उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटा देते हैं।
आज के समय में फैल रही अनेक गंभीर और भयंकर बीमारियों का सामना करना चिकित्सकों के लिए भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी वे कभी हिम्मत नहीं हारते और अंतिम क्षण तक रोगी को बचाने का हर संभव प्रयास करते रहते हैं।
एक चिकित्सक जीवन और मृत्यु के बीच खड़ा होकर रोगियों का उपचार करता है। अपने कर्तव्य का पालन करना कोई चिकित्सक से सीखे। मैंने टेलीविजन पर एक ऐसे चिकित्सक के बारे में देखा-सुना, जिनके इकलौते पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वे अपने पुत्र का अंतिम संस्कार करके सीधे अस्पताल पहुँचे। वहाँ एक रोगी की हालत अत्यंत गंभीर थी। उसके परिजन घबराकर चिकित्सक पर ही आरोप लगाने लगे। वो चिकित्सक बिना कुछ कहे ऑपरेशन थिएटर में गए, पूरे धैर्य और एकाग्रता के साथ ऑपरेशन किया एवं रोगी की जान बचा ली, परंतु उनके मन की पीड़ा और हृदय का दुःख कोई नहीं समझ सका। उन्होंने अपना दुःख छिपाकर किसी दूसरे का जीवन बचाया। वास्तव में ऐसे चिकित्सक ही सच्चे अर्थों में भगवान का स्वरूप हैं। उनका जीवन जनसेवा के लिए समर्पित होता है।
सन् २०२० में ‘कोविड-१९’ महामारी के दौरान चिकित्सकों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना दिन-रात सेवा की। वे १२-१२ घंटे तक बिना विश्राम के पीपीई किट पहनकर कार्य करते रहे। उन्हें न अपनी जान की चिंता थी और न ही अपने परिवार की। उनका एकमात्र लक्ष्य था—रोगियों का जीवन बचाना। उनका स्पर्श ही रोगी के लिए रामबाण औषधि के समान प्रतीत होता है। उनकी दवा, उनका आत्मविश्वास और उनका स्नेह रोगी के मन में जीने की आशा जगाते हैं। कई बार उनकी अथक मेहनत से रोगी मृत्यु के मुख से भी वापस लौट आता है। भगवान तो मनुष्य की किस्मत लिखते हैं, लेकिन उसकी रक्षा करने का कार्य चिकित्सक करते हैं।
अब हमारा भी कर्तव्य है कि हम चिकित्सकों का सम्मान करें। वे भी इंसान हैं और हमारी ही तरह थक जाते हैं। कभी-कभी उनसे भी गलती हो सकती है, लेकिन वे सदैव हमारे प्राण बचाने का भरसक प्रयास करते हैं। यदि हम उनके निर्देशों और सलाह का पालन करें, तो अनेक बीमारियों से बच सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसलिए हर चिकित्सक के प्रति सम्मान, विश्वास और कृतज्ञता का भाव रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
चाहे उनकी अपनी कितनी भी परेशानियाँ क्यों न हों, वे उन्हें भुलाकर समाज और मानवता की सेवा में निरंतर लगे रहते हैं। यही निःस्वार्थ सेवा उन्हें धरती का भगवान बनाती है। ऐसे महान चिकित्सकों के प्रति मैं श्रद्धापूर्वक नतमस्तक हूँ।