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राष्ट्र वंदना के स्वर में गूँजी कल्पकथा की काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)।

सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार ने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर २६२वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया। ‘राष्ट्र वंदना’ विषय पर राष्ट्रप्रेम, स्वाधीनता चेतना और साहित्यिक ओज के अनुपम संगम के रूप में यह हुई।
     संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का प्रभावपूर्ण ढंग से संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया और अध्यक्षता सैन्य साहित्यकार भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि मणिका वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई दी। उन्होंने बताया कि देश की स्वतंत्रता के अमृत इतिहास, राष्ट्रनायकों के त्याग, भारतीय संस्कृति की गौरवगाथा तथा मातृभूमि के प्रति समर्पण को केंद्र में रखकर सृजनकारों ने ५० से अधिक काव्य रचनाओं की ओजस्वी प्रस्तुति दी। शुभारंभ नागपुर से जुड़े प्रतिभाशाली साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के मंगलाचरण से हुआ। आध्यात्मिक आलोक से आरंभ हुई यह काव्यधारा शीघ्र ही राष्ट्रभक्ति के प्रखर प्रवाह में परिवर्तित हो गई। सांद्रा लुटावन गणेश ने सूरीनाम से सहभागी होकर भारतभूमि के प्रति अपनी आत्मीय भावनाओं को स्वर दिया। अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, ‘माणिक’, मणिका वर्मा, ‘प्रशांत’, मनोज कुमार गुप्ता ‘मंजुल ओज कवि’, पूनम सिंह ‘प्रियश्री’, रमापति मौर्य, डॉ. राजेश तिवारी ‘मक्खन’, शोभा प्रसाद, विष्णु शंकर मीणा, प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’, हेमचंद्र सकलानी, श्री डांगे तथा पवनेश मिश्र ने अपनी विविधवर्णी काव्य प्रस्तुतियों से स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भाव
रेखांकित किया।
   अंतिम चरण में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का भावपूर्ण गायन किया गया। तत्पश्चात पवनेश मिश्र ने सभी के प्रति हृदयपूर्ण आभार व्यक्त किया।