डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)…
राखी एक धागा ही तो है,
पर बाँधता है उम्रभर
कुछ अनकहे वादे,
कुछ मौन दुआएँ।
कलाई पर बँधकर भी,
रिश्तों को जकड़ता नहीं
दूरियों के पार से भी,
अपनापन थामे रहता है।
रक्षाबंधन एक पर्व नहीं,
वह बंधन है भाई-बहन के
स्नेह और प्रेम डोर का,
जो हर रिश्ते से मधुर है।
रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं,
यह असीम प्यार और विश्वास का प्रतीक है
देखो कितने चाव से सुंदर-सुंदर राखी,
बहना ने भाई की कलाई पर पहनाई हैं।
बहन की रक्षा भाई का कर्त्तव्य है,
बहन भाई को जीवनभर
खुश रहने की दुआएं देती रहे।
इस अटूट रिश्ते का पर्व,
अनंतकाल तक यूँ ही चलता रहे॥