नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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बेटी बचाओ तो दुर्गा बचेगी,
आज के जमाने में बेटी को बचाओ
बेटी ही दुर्गा होती, शक्ति होती,
मोदी जी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’
नारा बुलन्द किया जो सुपर बेटी नारा था,
बेटी के उत्थान के लिए जरूरी।
पढ़ाई अति आवश्यक है बेटियों की,
अपने पैरों पर खड़ा करने की जरूरत है
जिससे किसी पर निर्भर होना पड़े नहीं,
अच्छा और बुरा समझ सकती है अपनाl
जिस तरह दुर्गा माँ अपनी संतानों की रक्षा करती।
अगर पढ़ी-लिखी समझदार बेटी-बहू होती,
वह बचपन से ही संस्कार सीखती
अपने बुद्धि-विवेक से दोनों कुलों की रक्षा करती,
सृष्टि का आधार बेटी ही होती
आदि शक्ति स्वरूपा बेटी होती।
माँ की अनमोल धरोहर बेटी होती,
सही परवरिश करती अपनी बेटियों की
अपने जैसी ही मूरत गढ़ती,
भविष्य उज्जवल बनाती अपनी बेटियों का।
लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा का ही रूप होती बेटी,
बेटी किसी का बोझ नहीं होती
परिवार, समाज, देश का अभिमान होती,
देश में दहेज के लिए परेशान करता परिवार-समाज दोनों ही।
इससे उबर शक्ति, बेटी अपने बल पर ही,
आज भी नवरात्रि में पूजा होती बेटियों की
घर-घर बेटियों की,
समाज में घूम-घूम कर बेटी की खोज करना।
जो कर्म भ्रूण हत्या के पाप का होता है बेटी का,
इसीलिए कहा जाता – बेटी बचाओ तो दुर्गा बचेगी॥