Visitors Views 14

आडम्बर पर तमाचा जड़ती आश्रम

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
*******************************************************

सीजन -१ तथा अंक-९ का प्रत्येक अंक ४० से ४५ मिनट हैl निर्देशक-प्रकाश झा और कहानी हबीब फैसल की हैl
•श्रंखला से पहले चर्चा-
जीवन में एक गुरु का होना जरूरी है,वह गुरू धार्मिक,आध्यात्मिक, शिक्षा,नैतिक मूल्यों को लेकर हो सकता है,लेकिन वह पाखंडी हो तब ? तो वह गुरू कुशल ज़िन्दगी में काल भी बन सकता हैl यह श्रंखला(सीरिज)आस्था,श्रद्धा,विश्वास के बनते-टूटते रिश्तों को लेकर हैl अंधभक्ति हमेशा घातक सिद्ध हुई है भारतवर्ष में,धर्म कोई भी हो उसमें आडम्बर हमेशा अपराध को इंगित करता हैl इस श्रंखला में भी यही देखने को मिला हैl
•कहानी-
काशीपुर में एक बाबा निराला (बॉबी देओल) है,जो ज़ात-पात,गरीब-अमीर,ऊंच-नीच के भाव को मिटाने के साथ ही गरीबों के उद्धार के लिए एक मिसाल कायम किए हुए हैl ज़माने का सताया हो या शारारिक समस्या हो,या पोलिस या राजनीतिक,बाबा के पास हर समस्या का हल हैl बाबा का रुतबा इस कदर है कि,सफेदपोश राजनेता भी उनकी मदद लेकर सत्ता की कुर्सी पर आसीन होते हैंl इस तरह से पूरे प्रदेश की राजनीति या विपक्ष बाबा की उंगलियों की कठपुतली ही लगती हैl मुसीबत तब पैदा होती हैं,जब बाबा की शक्ति और बुलंदी कुछ लोगों को खटकने लगती हैl बाबा निराला भूतकाल में आपराधिक पृष्ठभूमि रखते थे,लेकिन वर्तमान में बाबा ने पुलिस,प्रशासन,राजनीति में इतनी गहरी जड़ जमा ली है कि,उसे उखाड़ पाना लगभग असंभव हैl
अदिति ओंकार दलित के कुश्ती में हार से शुरू होती है कहानी,जिससे स्पष्ट हो जाता है कि जातिवाद बड़ा मुद्दा होगा फ़िल्म मेंl अदिति के भाई की शादी में भाई घोड़े पर सवार होता है,और बड़ी ज़ात वाले या बड़े मोहल्ले वाले पिटाई कर देते हैंl अदिति पोलिस रिपोर्ट करती है,तो बड़े मोहल्ले वाले भाई का इलाज कर रहे अस्पताल के तमाम चिकित्सकों को बंधक बना कर इलाज रूकवा देते हैंl यह दबदबा थोड़ा ज्यादा दिखाया गया है,क्योंकि पोलिस प्रशासन मूक रहता है,और पूरा हॉस्पिटल बंधकl यहां बाबा निराला आते हैं और दलित बच्चे के इलाज के साथ बड़े मोहल्ले के बड़े लोगों का भी इलाज कर देते हैंl क्या सच में बाबा भगवान का अवतार है,जो आमजनों के दु:ख हरने आए हैं,लड़कियों की गुमशुदगी और बाद में लाशें मिलना क्या बाबा का कोई रिश्ता है, क्या कानून के हाथ सच में इतने लंबे होते है कि किसी भी अपराधी को कब्र से खोद लाए या पैसा,ताकत,राजनीति में सच्चाई दम तोड़ देगी…? इन सवालों के जवाब के लिए आश्रम देखी जा सकती हैl पहले सत्र के खात्मे के साथ बाबा की असलियत उजागर होने लगीl श्रंखला-२ का इंतज़ार करना पड़ेगाl

निर्देशकीय-

      प्रकाश झा ने बड़ी ईमानदारी से अपना काम किया हैl वह दर्शकों को बांधने में हमेशा से कामयाब रहे हैं,इसमें भी उनकी वही क्षमता दिखीl आश्रम-सेवादारों की विस्तृतता पर संतुलित और सुंदर काम किया गया हैl आश्रम का स्थायित्व दॄश्य अच्छा बनाया है,वहां के सेवादारों को देख कर भी अच्छा लगता हैl भीड़-भाड़ वाले दृश्यों में प्रकाश झा को महारत हासिल हैl आश्रम की गतिविधियों को बड़ी बारीकी से बनाया गया है,जिसमें सम्पूर्णता (डिटेलिंग)दिखती है। प्रकाश किसी-न-किसी सामाजिक कुरूति पर फ़िल्म बनाते हैं-गंगाजल,अपहरण आदि सभी फिल्में इसी पर आधारित रही हैl इसमें धर्म की आड़ में आडम्बर को विषय बनाया गया है,लेकिन जातिवाद किसी न किसी रूप में उनकी फिल्मों में बना ही हुआ है,इसमें भी देखने को मिला हैl  

अदाकारी-

     बॉबी देओल की दूसरी पारी अब कुछ कुछ पटरी पर लग रही है,जिसमें-रेस ३, सीरिज क्लास ८३,अब `आश्रम` हैl अनुप्रिया गोयंका अभिनय में सिद्ध अभिनेत्री हैl चंदन राय सान्याल बाबा के खास गुर्गे के किरदार में न्याय करते दिखेl दर्शन कुमार(दिल्ली)ने इंस्पेक्टर उजागर के किरदार से न्याय कियाl  इन सबके बीच तुषार पांडे भी बढ़िया अभिनय दिखा गए हैंl विक्रम कोचर ने कांस्टेबल के किरदार को जीवंत बना दियाl 

अंत में-

श्रंखला के ट्रेलर में ही स्पष्ट हो गया था कि, उद्देश्य धर्मगुरु को गलत इंगित करना या दर्शाना नहीं है,वरन धर्म की आड़ में बेशर्मी का जो चोला पहना जाता है,उस और ध्यान आकर्षित करना हैl

परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंL आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंL १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैL आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंL