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बादल

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’
कोटा(राजस्थान)
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घिर आए हैं काले बादल नभ के ऊपर,
उमड़-घुमड़ कर आज खूब भू पर बरसेंगे…
आतप से पीड़ित अब जीव सभी हरसेंगे,
भर जाएँगे जल से सारे नदी-सरोवर।
अगर नहीं बरसें बादल तो धरती ऊसर,
हरियाली के दृश्य देखने दृग तरसेंगे…
गीत नहीं जीवन के तब मन में सरसेंगे,
जीना सबका हो जाएगा सच में दूभर।
बादल के जल से ही जग में होते जंगल,
प्राणवायु जिनमें से है बह-बहकर आती…
वर्षा से ही इस जीवन की चले कहानी,
जल के कारण कहीं न हो आपस में दंगलl
मेल-जोल का कुदरत भी संदेश सुनाती,
बूँद-बूँद जल की अब तो है हमें बचानीll

परिचय-सुरेश चन्द्र का लेखन में नाम `सर्वहारा` हैl जन्म २२ फरवरी १९६१ में उदयपुर(राजस्थान)में हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए.(संस्कृत एवं हिन्दी)हैl प्रकाशित कृतियों में-नागफनी,मन फिर हुआ उदास,मिट्टी से कटे लोग सहित पत्ता भर छाँव और पतझर के प्रतिबिम्ब(सभी काव्य संकलन)आदि ११ हैं। ऐसे ही-बाल गीत सुधा,बाल गीत पीयूष तथा बाल गीत सुमन आदि ७ बाल कविता संग्रह भी हैंl आप रेलवे से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी होकर स्वतंत्र लेखन में हैं। आपका बसेरा कोटा(राजस्थान)में हैl