१९८४ का वो खौफनाक मंजर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “उफ्फ कितना भयानक मंजर था वह।”“किसकी बात कर रही हो आंटी ?”सुधा एकदम जैसे सपनों से जागी और बोली कि बस उस दिन को याद कर रही हूँ।“किस दिन को ?”“३१ अक्टूबर सन् १९८६ का दिन था बेटा। उसी दिन तेरे अंकल की पदोन्नति हुई थी। इंदिरा गांधी की हत्या कर दी … Read more

आशा है बेहतर नया साल मिले

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… बहुत ख़ूबसूरत रहा,बीता हुआ सालखुशियों के कुछ पल थे,कुछ दुखों के जाल। खुश रहना सीखा मैंने,चाहे जैसा भी हो हालकुछ खट्टी-मीठी यादें मिली,कुछ प्यार के वादे मिले। कहीं दोस्तों की महफ़िल मिली,कहीं ख़ुद को हम अकेले मिलेकहीं नफरतें झेली हमने,कहीं अपनों के मेले मिले। … Read more

समाज को अधिक मानवीय बनाना ही लेखन का उद्देश्य-पंकज मिश्र

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नई दिल्ली। तकनीकी विकास और बाजार की व्यवस्था ने कुछ हद तक मुक्ति भी दी है और एक अलग तरीके से अन्यायपूर्ण व्यवस्था भी बनाई है। लेखक का स्वप्न है कि ऐसा समाज बन सके जो न्याय आधारित हो। मेरा कहानी लेखन इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है कि हमारा समाज अधिक मानवीय बन … Read more

हिंदुत्व के पुरोधा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** स्वामी विवेकानंद जयंती (१२ जनवरी) विशेष… कलकत्ता में जन्म लिए प्रतिभाशाली नरेंद्र नाथ जी दत्त,माता भुवनेश्वरी, पिता प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त१२ जनवरी १८६३ मालूम है, जन्म वर्ष शुभ मुहूर्त का वक्त,शिक्षा ज्ञान से अभिभूत होकर बने माँ काली के परम भक्त। प्रेसीडेंसी कॉलेज व स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पाई … Read more

राजभाषा अधिनियम की धारा एवं नियम का योजनाबद्ध उल्लंघन

प्रति,सेवा में,सचिव (समिति),संसदीय राजभाषा समिति,११, तीन मूर्ति मार्ग, नई दिल्ली-११००११ विषय:राजभाषा अधिनियम की धारा ३(३) एवं नियम ११ के योजनाबद्ध उल्लंघन तथा द्विभाषी स्वरूप की त्रुटिपूर्ण व्याख्या के विरुद्ध गंभीर शिकायत। महोदय,मैं भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा राजभाषा नीति की निरंतर की जा रही अवहेलना और नागरिकों के साथ भाषाई … Read more

कब तेरी मंजिल आ जाए…!

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ज़िंदगी का हर एक पल कीमती है,फिर बरसों की तू क्यों सोचता है ?चार दिन के इस सफ़र में,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे पता..! फिर भी तू क्यों भटक रहा है ?माया-मोह व लालच के फरेब मेंवर्तमान को जी ले आनंद व उल्लास से,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे … Read more

ज्ञानचंद मर्मज्ञ को मिला ‘दोहा सम्राट’ सम्मान

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बेंगलुरु (कर्नाटक)। वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ को देहरादून के ‘लेखक गाँव’ में आयोजित अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान संस्था के वैश्विक अध्यक्ष पं. सुरेश नीरव के सान्निध्य में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा ‘दोहा सम्राट’ की उपाधि से सम्मानित … Read more

केकी कृष्ण की कविताओं में संघर्ष से जूझने और सीखने की प्रेरणा

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पटना (बिहार)। समकालीन कविता आज के समय, समाज और मनुष्य की वास्तविकताओं का सजीव दस्तावेज है। कवि केकी कृष्ण ने अपनी कविताओं से सामाजिक नफरत से परहेज और सहयोग की भावना को जीवनोपयोगी बताया है। उन्होंने जीवन के सुख-दुःख को स्वाभाविक मानते हुए उनसे संघर्ष करने और उनसे सीखने की प्रेरणा दी है।साहित्यिक संस्था भारतीय … Read more

नव वर्ष का उपहार

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ सुमित्रा की आँखों से अश्रुधारा निरंतर बह रही थी, आज वह बेसहारा हो गई थी। नीरा आंटी आज अचानक रात में सोईं तो सोती रह गई। उसके सिर के ऊपर से छत छिन गई थी। उसकी पालनहार आज दुनिया से विदा हो गईं थीं। वह उसे बेटी की तरह मानती थीं, कई … Read more

२ पुस्तक विमोचित

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दिल्ली। सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था ‘उद्भव’ ने सांस्कृतिक सम्मान व पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया। मुख्य अतिथि यमुनापार विकास बोर्ड के चेयरमैन अरविंदर सिंह लवली रहे। अध्यक्षता कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता विवि (रायपुर) के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. बलदेव भाई शर्मा ने की। मुख्य वक्ता जाने माने शिक्षाविद डॉ. अशोक पांडेय रहे। प्रो.डॉ. उमापति दीक्षित … Read more