आदेशों के आलोक में जनभाषा में न्याय की व्यवस्था करे सरकार
जनभाषा में न्याय… दिल्ली। स्वतंत्रता के ७८ वर्ष बाद भी औपनिवेशिक भाषा अंग्रेजी न आने के कारण देश के नागरिकों को अपने ही देश में अपने उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में और काफी हद तक निचली अदालतों में भी गूंगों-बहरों की तरह क्यों खड़े होना पड़ता है ? यह देश के १४० करोड़ देशवासियों … Read more