मेरी ‘शोभा’ मेरा शबाब
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:२२१२ १२२२ २१२१ २२ इक पौध पर खिले हम, जिसका खिताब तुम हो।हूँ खार शाख पर मैं, उसका गुलाब तुम हो। मुरझा कभी न जाना, दुनिया की गर्दिशों में,चमका करे हमेशा, वो आफताब तुम हो। दुनिया में बादशाही सजकर रहे हमारी,कहता जहान सारा इक माहताब तुम हो। खादिम रहूं … Read more